ज्योतिषीय  मान्यताएँ
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ज्योतिषीय मान्यताएँ

परमपिता परमात्मा द्वारा रचा गया यह अपरमित, और अद्भुत ब्रह्मांड जितना विशाल है, उतना ही रहस्यमयी भी। इसमें व्याप्त रहस्यों का कोई ओर-छोर नहीं है, फिर भी भारतीय ऋषि-मुनियों ने अपने तपबल और बौद्धिक क्षमताओं के आधार पर इन रहस्यों के रहस्य जानने के प्रयास किए और सफल भी हुये। <br>ब्रह्मांडीय आकार-प्रकार और उनकी गणनाएँ इंसान के दिमाग के वश की बात नहीं है, फिर भी एक बात निर्विवाद रूप से सत्य है कि ब्रह्मांड को उस परमात्मा ने पूर्ण रूप से अपने वश में कर रखा है और अपनी मर्जी के अनुसार इसे नचाता रहता है। मजाल है कि उसकी मर्जी के बिना एक पत्ता भी हिल सके। परंतु यहाँ यह भी ध्यातव्य हो कि ब्रह्मांड का हर काम एक बंधे हुये नियम से चलता है। क्या आपने कभी सुना है कि दिन के बाद दिन ही अवतरित हुआ हो, या छहों ऋतुओं ने अपना क्रम बदल दिया हो? नहीं न?<br>ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त जीव-निर्जीव किसी न किसी तरह एकदूसरे से जुड़े हुये हैं या एकदूसरे पर निर्भर हैं। इसीलिए यह सभी, एकदूसरे के बारे में कुछ ऐसे संकेत देते रहते हैं जो आने वाले समय में घटित होने की संभावना होती है। बात सिर्फ समझने भर की है, जिसने इन संकेतों को समझ लिया वह भवितव्य के लिए सतर्क हो कर अपना जीवन सुखमय कर सकता है।<br>पुस्तक में, ब्रह्मांड में स्थित ग्रहों का संक्षिप्त वर्णन किया गया है। साथ ही उनका मानव जीवन पर पड़ने वाले असर का वर्णन भी किया गया है। भारतीय ज्योतिषीय ज्ञान इतना वृहत्त है कि सहस्त्रों पुस्तकें लिखी जा सकती हैं। पुस्तक में कुछ भी ऐसा नहीं है जो मैंने अपनी मर्जी से यहाँ उद्धृत किया हो, बल्कि इस असीमित ज्ञान की कुछ बूंदें जहां से मिल सकीं उनको एकत्रित करके उन पाठकों के लिए छिड़की हैं जो परमात्मा की सत्ता में विश्वास करते हैं। पुस्तक में भारीभरकम ज्योतिषीय सूत्रों से बचने का पूरा प्रयास किया है और मात्र उन्हीं अवधारणाओं अथवा मान्यताओं का वर्णन किया गया है जो एक आम पाठक आसानी से समझ सके और चाहे तो उन्हें उपयोग में लाकर जीवन सफल बना सकें। <br><br>छत्र पाल वर्मा <br><br>

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6/29/2026
Source: https://fliphtml5.com/bxkwh/vjps

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